
मुझे प्रसन्ता है की नये वर्ष के प्रवेश कि वेला मै आपके मगलमय विकास कि कामना करता हु।भोतिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास अत्यन्त अनियवार्य है। हम सकल्प के साथ इस धारणा पर आये कि अध्यात्म के बिना शान्ति सम्भव नही है। आध्यात्मिक चेतना का विकास और उसका व्यवहारिक रुप है अहिसा। हम केवल शान्ति कि बात ना करे। उसमे पहले अहिसा को ह्र्दयगमन करे। हम नये वर्ष के प्रवेश के अवसर पर अतीत का अवलोकन करे । मुडकर देखे की गत वर्ष हमारा कैसा रहा ? हम गत वर्ष को ही नही बल्की आने वाले वर्ष के लिये भी शुभकामना करे ओर शुभ भ्विष्य कि प्रार्थना करे। अतित मै हमने क्या किया, हम देखे। भविष्य मे हम क्या करेगे ? जब तक अतित का अवलोकन वर्तमान का चिन्तन और भविष्य कि कल्पना मे सामजस्य नही होता, तब तक शान्ति की बात अपुर्ण रह जाती है।
इस पवित्र चेतना के साथ नये वर्ष मे प्रवेश करे और नये वर्ष कि उल्लास के साथ मनाये। हमार यह उल्लास स्थायी बने और नये वर्ष के लिये ऐसी साधना सामग्री जिटाये, जो अगले वर्ष को मगलमय और कल्याणमय बना सके।
-: प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञजी
2009 का स्वागत अपनी आन्तरिक मुस्कान के साथ करे। कलैण्डर के पन्ने पलटने के साथ साथ हम अपने मन के पन्नो को भी पलटते जाये। प्रायःहमारी डायरी स्मृतियो से भरी हुई होति है। आपदेख कि आपके भविष्य के पन्ने बीती हुई घटनाओ से न भर जाये। बीते हुये समय से कुछ सिखे, कुछ भुले, और आगे बढे।
इस बार नव वर्ष के आगमन पर पृथ्वी पर सभी के लिये शान्ति तथा सम्पन्नता के सकल्प के साथ शुभ कामनाये दे। आतकवाद के छाया तथा बाढ तथा अकाल के समय मे और अधिक नि:स्वार्थ सेवा करे। जाने कि इअस ससार मे हिसा को रोकना ही हमारी प्राथमिक उद्देशय है, तथा विश्व को सभी प्रकार कि सामाजिक तथा परिवारीक हिसा से मुक्त करना । समाज के लिये और अधिक अच्छा करने का सकल्प ले, जो पीडित है उन्हे धिरज दे। राष्ट्र-समाज-परिवार के प्रति उतरदायी हो।
:- श्री श्री रविशकरजी महाराज
हे प्रभु यह तेरापथ के परिवार कि ओर से नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये।
कल जहॉ थे वहॉ से कुछ आगे बढे,
अतीत को ही नही भविष्य को भी पढे,
गढा हैहमारे धर्म गुरुओ ने सुनहरा इतिहास ,
आओ हम उससे आगे का इतिहास गढे।
पुरब मे हर रोज नया , सूरज अब हमे उगाना है।
अघिकारो से कर्तव्यो को, ऊचॉ हमे उठाना है
ज्ञान ज्योति से अन्तर्मन, के तम का अब अवसान करना है।
छोडो सहारो पर जीना, जिये विचारो पर अपने,
सही दिशा मे शक्ती नियोजिन, करे फले सारे सपने,
स्वय बनाये राह, स्वय ही चरणो को गतिमान करे।


