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ये नश्वर मानव जीवन मेरा हर कदम पर मुझसे भूल होती है,

क्षमा सच्चे अर्थो मे

ये नश्वर मानव जीवन मेरा
हर कदम पर मुझसे भूल होती है,
सावत्सरी के इस पावन पर्व पर
कर याद भुलो को आत्मा मेरी रोती है
क्षमा दिवस के इस पुनित अवसर पर
सभी जीवो से मै क्षमापना करता हू.
उसी तरह,हे क्षमा के सागर
आपसे प्रार्थना करता हू
कर देगे क्षमा विशाल ह्रदय से
यह आशा रखता हू मै यही याचना
करता हू.


“Khamemi Savve Jiva, Savve Jiva Khamantu Mi

Mitti Me Savva bhuesu, Veram majjham na Kenai”

खमेमी सव्वे जीवा, सव्वे जीवा खामन्तु मी

मित्ती में सव्वा भुएसु, वेरम मजझाम ना केनाई

MY BLOG

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जीरो आयल थाली डॉ विमल छाजेड कि एक खोज

तेल रहित आहार

प्रारम्भ मे साओल जीरो ऑयल आहार हृदय रोग के बचाव के ईच्छुको के लिऐ बनाया गया था।

पिछले दस सालो मे साओल ने दक्षिण भारतीय,उत्तर भारतीय, पजाबी, राजस्थानी, गुजराती, से लेकर पशिचम भोजन नुडल्स पिज्जाआदि कि कई व्यजन विधिया तैयार कि है। इस विधि मे तेल घी का प्रयोग बिल्कुल ही मना है। जहॉ तक स्वाद का प्रशन है यदि मसाले पुरे हो तो स्वाद मे कोई कमी नही आती।

डॉ विमल जैन (छाजेड) (एमडी) एक जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ है।भारत मे हृदय की देखभाल तथा उपचार के विषय मे जागरुकता फैलाने के लिऐ “साओल हृदय अभियान” चलाया। वे राजस्थान के जैन परिवार से सम्बन्ध रखते है किन्तु उनका पालन-पोषण कलकत्ता मे हुआ। डॉ छाजेड की अन्तदृष्टि से साहयता पाकर हजारो रोगियो की चिकित्सा, बाईपास सर्जरी, व एजियोप्लास्टी के बिना सम्भव हो सकी। उअन्होने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान सस्थान मे साहयक प्राध्यापक के रुप मे कार्य किया तथा अपने अभियान के दोरान वही छः वर्ष तक शोधरत भी रहे। उन्होने अग्यारवे अन्टार्कटिका अभियान मे आयुर्विज्ञान सस्थान का प्रतिनिधित्व भी किया।

वे भारत तथा अन्य देशो मे पिछले पन्द्रह वर्षो से अपने व्याख्यानमालाओ द्वारा जागरुकता फैलाशे है। उन्होने अनेक पुस्तके भी लिखी है-

१) हृदय रोग पर नियन्त्रण के पॉच आसान तरिके (अग्रेजी)

२) हृदय रोग पर नियन्त्रण के लिऐ भोजन(अग्रेजी)

३) हृदय रोग को कैसे समझे (अग्रेजी)

४) हृदय रोग से मुक्ती

५)हृदय रोग कि जानकारी

६)जीरो ऑयल कुक बुक (हिन्दी/अग्रेजी)

७)जीरो ऑयल स्वीट बुक (हिन्दी/अग्रेजी)

८)जीरो ऑयल नमकिन बुक (हिन्दी/अग्रेजी)

९)जीरो ऑयल साउथ इण्डियन कुक बुक (हिन्दी/अग्रेजी)

सहित “जीरो ऑयल थाली” बुक कि हम आज चर्चा कर रहे है।

डॉ विमल छाजेड ” हार्ट टॉक” नामक मासिक पत्रिका भी निकालते है। लोगो कि सेवा एवम मानव को रोगो से मुक्त करने के लिऐ डॉ विमलजी ने आहार शुद्धि को माध्यम बनाकर इलाज का जो तरिका इजाद किया वह प्रन्सनीय है।

आप सोच रहे होगे तेल के बिना खाना कैसे बनेगा?: और स्वाद? अगर डॉ छाजेड कि बात माने तो जवाब हॉ मे और स्वादिष्ट भोजन बनेगा।

हमारे देश मे नाश्ता या नमकिन तैयार करने के लिऐ खूब तेल-घी इस्तेमाल करने की परम्परा है जो हृदय रोगियो के लिऐ बहुत खतरनाक है। इसलिऐ डॉ विमल छाजेड द्वारा बताए तरीको को अपना कर देखिऐ। आप स्वादिष्ट लजिज भोजन के साथ साथ स्वस्थ-प्रसन्न और फिट रहेगे।

(क) भुनना:-

भूनना तथा बेक करना लगभग एक समान है।यह कार्य १२० सेल्सियस डिग्री तथा २६० सेल्सियस डिग्री तापमान के बीच ओवन मे किया जाता है। साधरणतया पापड को भूना जाता है जबकि ब्रेड, केक तथा बिस्कुट पाकाऐ जाते है। भोजन थोड सूखी ऑच पर पकाया जाता है। तथा थोडी नमीदार ऑच पर पकाया जाता है। अगर भोजन अधिक नमीदार है,पकाने के लिऐ भोजन का तापक्रम शुरु मे नमी युक्त होना चाहिऐ ताकि ठण्डे पदार्थ को अनुकुल ताप पर लाया जा सके। कन्वेशन तरगे ओवन के तापमान को एक समान रखती है।इसमे तेल बिल्कुल भी प्रयोग मे नही लाया जाता।

(ख) उबालना:- उअबालने का मतलब है पानी मे पकाना । इस माध्यम मे पानी मे ताप परावर्तित होता है। पानी मे उअबालने का ताप १०० तथा अधिक ताप मान पर भोजन के स्वरुप मे बदलाव आने लगता है।

(ग) भॉप द्वारा पकाना:-

भॉप मे पकाने के लिऐ भॉप एक माध्यम है। यह बिना पानी कि कुकिग है। इस विधि द्वारा पकाने मे नमीदार तापमान की आवश्यकता होती है। भोजन थोडे पानी मे भॉप द्वारा पकाया जा सकता है। तथा पानी रहित कुकिग मे, खाघ प्रदार्थ मे उअपलब्ध पानी को ही भाप के रुप मे प्रयोग किया जाता है। प्रेअशर कुकर एक मात्र ऐसा यन्त्र ह जिसके द्वारा कम समय मे भोजन तैयार किया जाता है। भाप द्वारा भोजन पकाने से खाध पदार्थ कुकर मे निर्मित भाप मे पक जाता है। भाप मे खाध पदार्थ पकने कि प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि पदार्थ का तापमान भी भाप के तापमान तक नही पहुच जाऐ।

आप यहा क्लिक करके आगे पढे

आपको हम वो MaHa-PrEm महाप्रेम ब्लोग पर ले जाते है जिस पर प्रेमलताजी ने आपको

(क) भुनना:- (ख) उबालना:- (ग) भॉप द्वारा पकाना:- बिना तेल घी के मसाला भुनने का तरिका बडे ही सरल तरिके से बताया है।

अब  प्रेमलताजी आपको कोई भी दो सब्जी बनाने कि विधि भी बताते है।

मूग दाल

मिक्स सब्जी

आप सीखे एवम कोई सहयोग चाहिऐ तो महाप्रेम पर कमेण्ट करके पुछे।

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हे प्रभु यह तेरापन्थ के महावीर सेमलानी कि २२ मई को शादी कि शालगिरह है के विशेष अवसर पर आपके आर्शिर्वाद की अपेक्षा।

HEY PRABHU YEH TERA PATH

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर

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नेटवर्किग साईटस का नेट वर्किग

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नेटवर्किग साईटस का नेट वर्किग

थोडा पिछे जाकर देखे तो ९० के दशक के मध्य मे ही आनलाईन क्म्यूनिटी के रुप मे सोशल नेटवर्किन्ग कि शुरुआत हुई थी । इस काम इन्तजाम देने वाली वेबसाईट थी “जियोसाइटस”ट्राइपोड,और दग्लोबल डॉट कॉम।

२००२-२००४ के बीच माइ-स्पेस, बेबो और फ्रेन्ड्स्टर बडी सोसल नेटवर्किग साइटस के रुप मे सामने आए।

लेकिन असली रिवोल्यूशन आया २००४ मे आर्कुट और फेस बुक से । इन्हने तेजी से पैर पसारे और सोशल नेटवर्किन्ग के काफी बडे हिस्से पर काबिज हो गऐ।

इन्ह दिनो बिजनेश के लिहाज से सबसे चर्चित लिन्क्डइन वेबसाईट ने थोडे ही वक्त मे २०० देशो मे करीब ३-६ करोड यूजर तैयार कर लिए है। इस साइट पर रोजाना लाखो नए यूजर जुड रहे है।  लिन्क्डइन का दावा है कि फॉच्यून ५०० कम्प्नीयो के युजर यहॉ है।

ऑरकुट कि कहानी

इसके सस्थापक ऑरकुट बायोक्टेन के बारे मे मीडिया मे उस तरह नह छपता रहता जिस तरह फेसबुक के मालिक के बारे मे छपता है रहता है। २००४ मे गूगल ने ऑरकुट नामक अप्लीकेशन को खरीद लिया था । बायोक्टेन ने दरअसल अपनी गर्लफ्रेन्ड को खोजने के लिए एक ऐसी चीज की परिकल्पना की,जिसके जरिऐ वह उस का पत्ता लगा सके। बायोक्टेन जब छोटे थे तो स्कुल मे एक लड्की से उनकी दोस्ती हुई। लेकिन हाईस्कुल मे दोनो बिछुड गये। बहरहाल, बायोक्टेन २० साल के हुऐ तो वह आईटी के टेक्निकल आर्किटेक्ट बन गऐ और गर्लफ्रेन्ड के बिछडने का गम उनको परेशान करता रहा। तब उन्होने कम्प्यूटर इन्जनियरो से एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करने को कहा, जिसके जरिए मैसेज भेजे जा सके और दुसरा भी अपना मैसेज लिख सके। सोशल नेटवर्किग की भाषा मे इसी को स्क्रैप करना भी कहा जाता है। तीन साल की मशक्कत के और पैसा खर्च करने के  बाद बायोक्टेन को अपनी खोई हुई गर्लफ्रेन्ड मिल गई।

गूगल को ऑरकुट खरीदने के पहले ही साल मे एक अरब रुपऐ का मुनाफा हुआ। ऑरकुट पर आपकी हर गतिविधि के एवज मे गूगल बायोक्टेन को कुछ पैसा देता है।

फैसबुक की कहानी

हॉवर्ड कॉलेज मे कम्प्यूटर साइन्स के स्टुडेन्ट मार्क जुकेरबर्ग ने अपने दो रुममेटस कि मदद से ४ फरवरी २००४ को फेसबुक की स्थापना की। इस साईट पर खुद को रजिस्टर करने की एक ही शर्त थी कि आप हॉर्वड के स्टुडेन्ट हो।  लेकिन २००६ सितम्बर, मे  जुकेरबर्ग ने इसका दरवाजा पुरी दुनिया के लिऐ खोल दिया। यही से सफलता कि सीढिया फेसबुक ने चढी कि ऑरकुट को पिछे धकेल दिया। २००६ मे याहू ने फैसबुक को एक अरब मे खरीदना चाहा  लेकिन जुकेरबर्ग ने इसे ठूकरा दिया। दसल गूगल के पास ऑरकुट है तो रुपर्ट मर्डोक की कम्पनी न्यूजकॉर्प के पास माई स्पेस है जिसे खुद न्यूजकॉर्प ने २९ अरब मे खरीदा था।

दुनियॉ मे टॉप सोशल नेटवर्किग साईट

वेबसाईट महीने मे विजिट

www.facebook.com 1.1   अरब

www.myspace.com 81   करोड
www.twitter.com 5.4   करोड

www.flixter.com 5.3   करोड
www.linkedin.com 4.2   करोड


भारत मे टॉप नेटवरकिन्ग साइट्स

www.orkut .com                                        1.2   करोड
www.facebook.com 40 करोड
www.bharatstudents.com 33  लाख
www.hi15.com 20  लाख

www.ibibo.com 09  लाख


भारत मे पॉच करोड लोग सोशल नेटवर्किन्ग यूजर।

सोशल नेटवर्किन्ग साइटस पर ऑसतन 25 मिनट बिताता है।

भारत मे इन्टरनेट यूजर मे से एक तिहाई सोशल नेटवर्किन्ग साइट पर है।

हे प्रभु यह तेरापथ  द्वारा रिचर्च

नवभारत टाईम्स अथवा नेट सोर्सिग के माध्यम से

धवल शाह मुख्या सोशलनेट के विशेषज्ञ

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नव वर्ष की शुभकामना


चिट्ठाजगत
मुझे प्रसन्ता है की नये वर्ष के प्रवेश कि वेला मै आपके मगलमय विकास कि कामना करता हु।भोतिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास अत्यन्त अनियवार्य है। हम सकल्प के साथ इस धारणा पर आये कि अध्यात्म के बिना शान्ति सम्भव नही है। आध्यात्मिक चेतना का विकास और उसका व्यवहारिक रुप है अहिसा। हम केवल शान्ति कि बात ना करे। उसमे पहले अहिसा को ह्र्दयगमन करे। हम नये वर्ष के प्रवेश के अवसर पर अतीत का अवलोकन करे । मुडकर देखे की गत वर्ष हमारा कैसा रहा ? हम गत वर्ष को ही नही बल्की आने वाले वर्ष के लिये भी शुभकामना करे ओर शुभ भ्विष्य कि प्रार्थना करे। अतित मै हमने क्या किया, हम देखे। भविष्य मे हम क्या करेगे ? जब तक अतित का अवलोकन वर्तमान का चिन्तन और भविष्य कि कल्पना मे सामजस्य नही होता, तब तक शान्ति की बात अपुर्ण रह जाती है।

इस पवित्र चेतना के साथ नये वर्ष मे प्रवेश करे और नये वर्ष कि उल्लास के साथ मनाये। हमार यह उल्लास स्थायी बने और नये वर्ष के लिये ऐसी साधना सामग्री जिटाये, जो अगले वर्ष को मगलमय और कल्याणमय बना सके।

-: प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञजी

2009 का स्वागत अपनी आन्तरिक मुस्कान के साथ करे। कलैण्डर के पन्ने पलटने के साथ साथ हम अपने मन के पन्नो को भी पलटते जाये। प्रायःहमारी डायरी स्मृतियो से भरी हुई होति है। आपदेख कि आपके भविष्य के पन्ने बीती हुई घटनाओ से न भर जाये। बीते हुये समय से कुछ सिखे, कुछ भुले, और आगे बढे।

इस बार नव वर्ष के आगमन पर पृथ्वी पर सभी के लिये शान्ति तथा सम्पन्नता के सकल्प के साथ शुभ कामनाये दे। आतकवाद के छाया तथा बाढ तथा अकाल के समय मे और अधिक नि:स्वार्थ सेवा करे। जाने कि इअस ससार मे हिसा को रोकना ही हमारी प्राथमिक उद्देशय है, तथा विश्व को सभी प्रकार कि सामाजिक तथा परिवारीक हिसा से मुक्त करना । समाज के लिये और अधिक अच्छा करने का सकल्प ले, जो पीडित है उन्हे धिरज दे। राष्ट्र-समाज-परिवार के प्रति उतरदायी हो।

:- श्री श्री रविशकरजी महाराज

हे प्रभु यह तेरापथ के परिवार कि ओर से नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये।

कल जहॉ थे वहॉ से कुछ आगे बढे,

अतीत को ही नही भविष्य को भी पढे,

गढा हैहमारे धर्म गुरुओ ने सुनहरा इतिहास ,

आओ हम उससे आगे का इतिहास गढे।

पुरब मे हर रोज नया , सूरज अब हमे उगाना है।

अघिकारो से कर्तव्यो को, ऊचॉ हमे उठाना है

ज्ञान ज्योति से अन्तर्मन, के तम का अब अवसान करना है।

छोडो सहारो पर जीना, जिये विचारो पर अपने,

सही दिशा मे शक्ती नियोजिन, करे फले सारे सपने,

स्वय बनाये राह, स्वय ही चरणो को गतिमान करे।


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joyful Christmas and God’s richest blessings in the New Year


As we get ready to celebrate another Christmas our country is facing serious challenges with rising crime, high unemployment, a growing public debt, and deteriorating moral standards.  Many citizens may ask, “What can Christmas offer in the face of such problems?”  Can the celebration of Christmas make our economic and social problems disappear?  There will be many homes without a decent Christmas meal.  Many parents would not be able to give their children the kinds of gifts that they desire.  But why is this so?  Why have we lost faith in our society’s ability to care?

Perhaps we have lost faith because we have been deceived too many times. Our faith may become challenged when faced with economic uncertainties. Or we have lost faith because criminals are taking over our communities.

Unfortunately, violence has become a staple in our daily lives.  But can our communities become filled with peace?  Absolutely!  We simply have to open our communities to Jesus Christ.  Jesus said, “Peace I leave with you, my peace I give unto you: not as the world giveth, give I unto you.  Let not your heart be troubled, neither let it be afraid.”  (John 14:27)

Christmas can impact our lives beyond all the hardships we face.  We can feel the true spirit of Christmas when we help those who are less fortunate than ourselves.  Therefore, as we celebrate Christmas, let us remember our friends and our neighbours who are in need of our help.  Let us extend God’s peace and goodwill to all our people. And let us give thanks to the Almighty God for His tender mercies.

As we look ahead to 2009, we envisage change. Change that would bring hope; change that would bring peace; change that would bring unity; change for the good of this Federation; change that we all can believe in.

I wish you a joyful Christmas and God’s richest blessings in the New Year.  A change is going to come

कॄपाय हिन्दी मे पढने के लिये लोग ईन करेः-

http://ombhiksu-ctup.blogspot.com/
“हे प्रभु यह तेरापन्थ”

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joyful Christmas and God’s richest blessings in the New Year.

As we get ready to celebrate another Christmas our country is facing serious challenges with rising crime, high unemployment, a growing public debt, and deteriorating moral standards.  Many citizens may ask, “What can Christmas offer in the face of such problems?”  Can the celebration of Christmas make our economic and social problems disappear?  There will be many homes without a decent Christmas meal.  Many parents would not be able to give their children the kinds of gifts that they desire.  But why is this so?  Why have we lost faith in our society’s ability to care?

 Perhaps we have lost faith because we have been deceived too many times. Our faith may become challenged when faced with economic uncertainties. Or we have lost faith because criminals are taking over our communities. 

 Unfortunately, violence has become a staple in our daily lives.  But can our communities become filled with peace?  Absolutely!  We simply have to open our communities to Jesus Christ.  Jesus said, “Peace I leave with you, my peace I give unto you: not as the world giveth, give I unto you.  Let not your heart be troubled, neither let it be afraid.”  (John 14:27)

 Christmas can impact our lives beyond all the hardships we face.  We can feel the true spirit of Christmas when we help those who are less fortunate than ourselves.  Therefore, as we celebrate Christmas, let us remember our friends and our neighbours who are in need of our help.  Let us extend God’s peace and goodwill to all our people. And let us give thanks to the Almighty God for His tender mercies.

 As we look ahead to 2009, we envisage change. Change that would bring hope; change that would bring peace; change that would bring unity; change for the good of this Federation; change that we all can believe in.

  I wish you a joyful Christmas and God’s richest blessings in the New Year.  A change is going to come

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मै भी बना ढेड होशियार

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नेट एक्स्प्लोरर- 001

साइट ऑफ द महावीर

व्यक्त्ति को अपने काम कि जरुरत के मुताबिक बेवसाइटो कि यादे बन रहती है। किन्तु अचानक कोई चीज की दरकार हो तो गुगल कि घण्टो खाक छाननी पडती है। और उसमे सही साईट मिलना एक खोज का विषय माना जाता है।”महावीर” नेट एक्स्प्लोरर” मे मैने यहॉ कुछ वेबसाइट कि जानकारी एवम पत्ते दे रहा हु जो रोजाना महिलाओ बच्चो एवम शिक्षा के लिहाज से अतिउपयोगी है। यह साईटो के पत्ते आपको रोजर्मरा की आवश्यकताओ को पुर्ण करने मे सफल होगी।

महावीर” नेट एक्स्प्लोरर मे आप देख सकते है गृहणीयो के लिये ब्युटी ,शादी की प्लानिग, टीपस,ज्यूलरी, आइसक्रिम बनाना, लव, डिप्रेशन से मुक्ति,। शॉपिग क्या? कहॉ से ? क्या पहने क्या नही ?, कम बजट मे फैसन कैसे करे ?हेयर स्टायल, क्राफ्ट, डेकोरेशन, से लेकर कुकिग, पेरेटिग तक सभी कुछ है इन्ह पत्तो पर। बच्चो के लिये घर बैढे कुछ भी सिखना हो तो, स्पो‍र्ट्स से जुडे साल्युशन, आनलाइन स्पो‍र्ट्स गेम, स्पो‍र्ट्स कैप, और बहुत कुछ है, बडे बुढो के लिये हिन्दि साहित्य जगत, अग्रेजी और अन्य भाषाओ मे सभी कुछ देख पढ सकते है या घर मे बेठकर ही चारो धाम के दर्शन करके आ सकते है। ऐसा नही है कि यह आपको इस साईटो कि जानकारी नही है हो सकता है आप जानते हो, किन्तु यह उन्ह लोगो के लिये जो कम समय मे अपने लक्ष्य को पा ले। उपरोकत सभी साईटो के पत्ते विभन्न माघ्यमो से प्राप्त किया है विशेषकर नवभारत टाइम्स का, गुगल दुनिया,

“महावीर” नेट एक्स्प्लोरर”, कि प्रस्तुती लि जा रही है। यह क्रमश चार एपी सोड मे देखा पायेगे। अभारः- महावीर

www.apanloan.com

इस वक्त लोन शब्द कुछ करन्ट की तरह लगता है। कर्ज लेने वालो को ही नही बल्कि बैन्क भी फुक-फुक कर कदम रख रहे है। यह साईट विभन्न बैन्को से जुडे लोगो के सारे विवरण उपलब्ध करवाती है। एक्सपर्ट व्यु और लोनस कैलकुटर भी यहॉ।साथ ही और भी बहुत कुछ।

www.gadgets.in

यह साइट भारत सभी ताजा गैजेटस जैसे स्पाई कैमरा, मेकेनिअकल चार्जर, शावर रेडियो आदि के बारे मे सम्पुर्ण जानकारी देती है।इसके अलावा आईफोन,और लैपटॉप जैसे गैजेट तो है है। आप चाहे तो आनलॉयन शॉपिग भी कर सकतीहै।

www.bis.org.in

इस वेबसाइट से आप अपनी गोल्ड ज्यूलरी के हॉलमार्क के बारे मे जानकारी ले सकती है। आपकी हर ज्यूलरी पर ब्योरो ऑफ स्टैडर्ड का मार्क ,इसकी कैरेट की जानकारी, इसके अनुशार ग्रेड, ज्वेलर का मार्क और तारिख जैसी बॉते होनी जरुरी है। ये मार्क क्या और कैसे है, इसका विवरण है यहॉ।

www.zebrakeys .com

यह साइट पर पियानो सिखा जा सकता है। आप्को बस फ्लैश प्लेयर डाउअनलोन करना होगा।आप चाहे बिगिनर्स हि या एक्सपीरियन्स्ड दोनो तरह के यहॉ लेसन दिये गये है। दिलचस्प यह कि ये लेशन कई भाषाओ मे सिखे जा सकते है।

www.perfectApology.com

सॉरी कहना एक और बात है और अपनी गलती को दिल से स्वीकारना और। दरअसल माफी मॉगते समय शब्दो का चयन कुछ ऐसा हो कि सामने वाले को अहसास हो जाए कि आपने वाकई माफी माग ली है। केसे होगा यह , जानने मे मदद करेगी यह बेवसाइट।

नेट एक्स्प्लोरर

dandiyazone.com

आज के समय मे गरबा डॉडीया,नृत्य, उफान पर है। किस कोने मे क्या हो रहा है यह जानिये।साईट पर गरबा से झुडी कई चीजे है। इवेन्ट्स से लेकर फैशन तक, डान्स के टीप्स से लेकर मस्ती और धुम भरे गाने तक सब कुछ यहा है।

नेट एक्स्प्लोरर

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स्कुल मे स्पो‍र्ट्स के इनफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम किया जाना बाकि है। यह साइट स्कुलो को स्पो‍र्ट्स से जुडे साल्युशन उपलब्ध कराती है।मुम्बई के स्कूलो के बीच हो रहे स्पो‍र्ट्स इवेटस और टूर्नामेन्ट के लिए भी यह साइट काम कि है। आनलाइन स्पो‍र्ट्स गेम, एसएमएस पोल, स्पो‍र्ट्स कैप, और बहुत कुछ है इस नेट एक्स्प्लोरर मे।

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www.dotcomwomen.com

इस साइट पर होम, लाइफस्टाइल, क्राफ्ट, डेकोरेशन, से लेकर कुकिग, पेरेटिग तक सभी कुछ है। हेयर स्टाइल,फैशन, और शादी की प्लानिग से जुडे बेहतरीन आर्टिकल्स है यहा। बच्चो के लिये चटपटी और हेल्दी रेसिपीज भी है तो आपके लिऐ हेल्दी रहने के टीप्स भी साथ ही और भी बहुत कुछ ।(क्रमश>>>>>अगले अक मे}

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मुबई मे बडा फियादिन हमला, अबतक का सबसे बडा आतकि हमला

मुबई मे बडा फियादिन हमला, अबतक का सबसे बडा आतकि हमला
मुबई २६ नवम्बर
रात्रि करीब देर रात मे भारत कि आर्थिक राजधानी मुबई एक बार फिर ऑतकी हमले से कॉप उठी। अतिसुरक्षित माने जाने वाले दक्षिण मुम्बई के कोलाबा, छ्त्रपति शिवाजी रेल्वे स्टेशन, ताज होटल, ऑबेरॉय होटल, टाईम्स ऑफ इण्डिया बिल्डिग, मझगॉव, विर्लेपार्ले मे भारी मात्रा मे गोलि बारी कर आतकवादियो ने सैकडो लोगो कि जान ली। बहुत से लोग को घायल अवस्था मे नजदिकी अस्पतालो भर्ती किया गया। समाचार मिलने तक कुछ आतकवादी न्यु ताज होटल मे चोथी ,पॉचवी, सातवी मन्जिल मे चुपे हुए हो सकते। ऑतकवादिओ ने आचान ऐके 47 सहित अति आधुनिक ह्थियारो से लैस बताऐ जा रहे है अचानक गोलिबारी शुरु करने पर भारी, भिड भरे ईलाका केपिटल थैयटरके पास खुन कि नदिया बहने लग गई । लोगो मे अफरा तफरी मचगई। विर्लेपार्ले मे एक टेक्सी मे विस्फोट से टेक्सी के परखचे उड गये। यहॉ पॉच लोगो के मरने कि खबर है।अब तक सात अलग अलग जगहो मे विस्फोट होने के समाचार है। मुम्बई पुलिस, रेल्वे पुलिस, ऐसटीसी, सहित अर्ध्दसैनिक बल कि टुकडिया विभीन्न ईलाको मे तैनाद कि गई है। अब तक जो ख्बर आ रही है उसके मुताबीक ७० लोगो कि मोत हुई है, और २०० के करीब घायल हुये है । जिसमे कुछ विदेशी भी हो सकते है। ऑबेरॉय होटल मे करिब ४० लोगो को बधक बनाये जाने की खबर है। इसमे कई विदेशी नागरिक भी हो सकते है। कमान्डो कारवाई कि तैयारी लगभग शुरु होने वाली है।

मेट्रो थेटर, सैन्ट्रल हॉटल के पास भी धमाका हुआ। हॉटल ताज मे चार किक्रट टीमे रुकने वाली थी। यह ऑतकि हमला भारत के पर्यटक उधोग को खत्म करने कि मन्शा लिये हो सकता है क्यो कि ताज होटल, ऑबेरॉय होटल, मे हजारो विदेशी पर्यटक, विदेशी उधोगपति, विदेशी व्यापारी, ठहरते है। श्रख॑ला बध्द तरिके से 1992 के मुबई बम बलास्ट के बाद अब तक का सबसे बडी आतकवादी हमला है। ताज मे आतकवादी ग्रेनड से धमाके किये ऐसी भी खबर है। पुरा मुबई थ‍रथारा उठा है। लोगो मै दशहत है। मैरीयट हॉटल मे भी फायरिग होने के समाचार। आतकवादऔ कि यह कायर्ता पुर्ण हमले कि दुनिया भर से निन्दा होनि ही चाहीये। कई बैकसुर लोगो कि जाने चली गई। भगवान मेरी मुबई कि रक्षा कर । ए टी एस प्रमुख हेमन्त करकरे,विजय सालास्कर, ए सी पी अशोक कामत सहीत कई पुलिस के जवान शहीद हुये।
मुम्बई से मै महावीर.

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बाल अपराध हमे रोकना होगा॥॥

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नेहरुजी के गाल पर चुम्बन

आज बाल दिवस है, दुनिया भर के बच्चो को बाल-दीवस पर हार्दिक शुभ कामनाऐ। एक रोचक प्रसग है- चाचा नेहरु बच्चो मे हिलमीलकर एक हसी-मजाक कर रह थे। उन्होने प्यार से एक बच्चे के गाल पर चुम्बन ले लिया। इस पर वह बच्चा रोने लग गया। बच्चा बोला-”चाचा जी आपने हमारे गाल को झुठा कर दिया, अब हम भी आपके गाल को झुठा करेगे।” नेहरुजी ने यह सुनकर चुप्चाप अपना मुह  बच्चे के सामने कर दिया। बच्चे ने भी नेहरुजी के गाल पर चुम्बन ले लिया नेहरुजी गदगद हो गये।


बालदिवस पर विशेष॥॥

प्रिय बच्चो।

तुम्हारे प्यारे “हिन्दी पाक्षीक पत्रिका “बच्चे” के ताउ श्री महावीर ताउ का प्यार भरा नमस्कार। बच्चो पता है आज देश भर मे तुम्हारे नाम कि सुबह से जय जयकार क्यो हो रही है ? रात होते होते तो यह ठण्डी पड जायेगी। और फिर एक सन्दुक मे अगले वर्ष तक बन्द हो जायेगी। सुना है आज के दिन भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलालजी नेहरु का जन्म दिवस है और उन्हे बच्चो से प्यार था  इस लिये बाल दिवस मनाते है। मुझे तो लगता है इसकी प्रासगिकता अब नही रही। इस तरह के आयोजन मात्र कार्यक्रमो कि खाना पुर्ती मात्र है।

बच्चो रोज हसाने वाला ताउ आज व्यथित है। सजिदा हो उठा है मेरा मन। बाल अपराध आज विश्व की भयकर समस्या है। आतक को गोली से उडाया जा सकता है, किन्तु बाल अपराघियो का किया क्या जाये ? दिन प्रतिदिन हर जाति, राष्ट्रिस समस्या से ग्रस्त हो रहा है। किसी जमाने मे नरायम पैसे जातियो के बच्चे चोर बन जाते थे । उन्हे बच्चपन से ही चोरी आदि सिखा दी जाती थी। उनका वातावरण ही ऐसा हुआ करता था कि पॉच और दस वर्ष के बच्चे गाली देना, शराब पिना,चोरी करना सिख जाता था । यह अपराध कुछ जातियो तक सिमित रहता था।

परन्तु आज स्थिति भिन्न है। हर वर्ग गरिब- अमिर, शिक्षित,अशिक्षित, बच्चे अपराधी बनते जा रहे है। और तो ओर छोटे-छोटे बच्चे भी आज दखलअन्दाजी नही चाहते है। माता पिता की टोका टोकि भी आज असहय लगने लगी है।

बाल अपराध के मुख्य चार कारण है-

  1. अभावः- अभाव मे स्वभाव बिगडता है। छोटे बच्चो के कोमल दिमाग पर  अभाव कि क्रूरता का स्थायी अकन हो जाता है। मात पिता के अभाव स झुझते रहने मे पुरा समय बीत जाता है। बच्चो पर ध्यान देने का उन्हे अवकाश ही नही मिलता ? उनके बच्चे स्कुल नही गलियो मे आवारा गर्दी करते पाये जायेगे।
  2. अतिभावः- जीवन मे अभाव अभिशाप है तो अतिभाव भी बहूधा अभिशाप बन जाता है। अतिभाव मे माता-पिता कल्बो, पार्टियो मे, घुमते रहते है बच्चे नोकरो के भरोसे बडे होते है। बच्चे को सभालने को उनके पास समय कहॉ है ? कहने का अर्थ है माता-पिता सीधा सम्पर्क  बच्चो के साथ कम रहता है। इसलिये बुराई पनपती है -ड्रिकिग,स्मोकिग दोनो बाते इसमे आ जाती है। हाथ खर्च कि छुट रहती है मम्मी को टाइम नही रहता।
  3. वातावरणः- बाल अपराध मे वातावरण कि भुमिका मुख्य है। आज स्कुलो मे वातावरण  नशा प्रधान बन गया है दुनिया का किसी भी विश्वविधालय का सर्वे करके देख लिजिये ज्यादातर  छात्र स्मोकिग करते पाये गये है। एक दुसरे कि होडा होड कि प्रवति बच्चो मे अधिक होती है और इसी महामारी ने अपराधि मनोवृति का निर्माण किया। नशे से उत्तेजना बढती है और उत्तेजना से व्यक्ति अपराधि बनता है।
  4. साहित्य और सिनेमा:- बाल अपराध का चोथा कारण साहित्य और सिनेमा है छोटे बच्चे ओर किशोरो मे मनोरजन प्रियता अधिक होती है । नाटक सिनेमा बडे चाव से देखते है। अश्लिल एवम मारधाड के द्रृश्य देखने मे बडे ही रोमाचित होते है बच्चे। कच्चे दिमाग मे यह बाते यो कि यो जम जाती है। मनोरजन के साथ ये बुराईया सहज ही मिल जाती है।

प्रिय बच्चो । कोई मा बाप चाहे खुद कैसे ही हो पर अपने बच्चो को बुरा बनाना नही चाहते है। उसे नेक विनम्र्, अनुशाशित देखना चाहते है।

मात पिता अगर सजग हो शिक्षक और समाज ,नेता यदि जागरुक हो तो देश का नृतवर्ग यदि सजग हो तो बाल अपराध रोका जा सकता है। बच्चो आप मे भी बुरी आदते हो तो छोड दे तभी चाचा नेहरु प्रसन होगे॥॥॥

बच्चो मुझे क्षमा करना आज के दिन मेने कुच्छ कठोर कहा।

बाल दिवस पर बालको के हित कि बात

मै निर्भय बनकर जीउग॥

मै सहनशील बनकर जीउगा॥

मै शक्त्तिशाली बनकर जीउगा॥

मै ईश्वर का सच्चा भक्त बनकर जीउगा॥

मै मॉ-बाप के धन का दुर उपयोग नही करुगा॥

मै गन्दे विचारो से मन को खराब नही करुगा॥

मै खान पान के कारण बिमार नही बनुगा॥

मै ऐसा काम नही करुगा जिससे मॉ-बाप को कष्ट हो॥

मै शरीर और बुद्धि का अच्छे कार्यो मे उपयोग करुगा॥

हे!ईश्वर!मेरे मे वह शक्त्ति पैदा हो,

जिससे मै नैतिक रह सकू प्रामाणिक रह सकु॥

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मॉ तुम्हारी याद आई


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मॉ !आदरणिय पाठको को मेरा नमन!
आज ससार मे ऐसा कोई भी व्यक्त्ति नही होगा जिसने मेरे जितना अपनी मॉ का आशीर्वाद प्राप्त किया होगा।
11-NOV-2005 ठीक 3 वर्ष पुर्व मेरी मॉ हमे छोड चली गई। मॉ का आशीर्वाद मु़झे सफलता कि मजिल की ओर अग्रसर करने मे पुर्ण रुप से साहयक बना। मुझे कदम कदम पर शक्ति एवम सम्बल प्रदान किया । मेरे मस्तिषक के स्मृति पटल पर मॉ का रुप सदैव युगो युगो तक अकित रहेगा। मेरी यही ईच्छा है कि हर जन्म मे मुझे यही मॉ मिले॥॥॥
आज मै जीवन के जिस मुकाम हू उसमे मेरे मॉ और बापुजी कि अहम भुमिका है। उन्होने अपनी कल्पना के चित्रो के रगो को मुझमे भरकर मेरे जीवन को आनदमय बना दिया। मै अपने जिवन के अतिम क्षणो तक पुर्ण रुप से कोशिश करुगा कि हर अधुरे सपने को पुरा करु॥॥॥॥
आज जबकी उनका नश्वर शरीर इस दुनिया मे नही है, मै अपने आप को अकेला महसुस करता हु क्यो कि मेरे दिन की शुरुआत मॉ के आशीर्वाद से शुरु होकर अन्त मे मॉ आशीर्वाद से ही समाप्त होती थी।
“समन्दर का कही छोर नही होता
बच्चो की किलकारी शोर नही होता
प्यार के दिखावे बहुत है यारो
मॉ की ममता जैसा कुछ और नही होता॥”

यह प्रथम पुष्प उसी मॉ की चरणो मे सादर समर्पत॥॥

मॉ तुम्हारी याद आई

मॉ !
कितना मघुर, कितना सुखद,
कितना पवित्र है यह सम्बोधन!
तुम हमे छोडकर इस नश्वर दुनिया से
दूर चली हो
जहॉ से लोट कर
आज तक कोई नही आया।

मॉ!
ममता का कोई मोल नही होता।
9 महीने कोख मे रखकर
अपने रक्त से सीचती है
तब कही जाकर बच्चे को
इस दुनिया मे आने का
सोभाग्य मिलता है।
हाडमास के छोटे से पुतले को
बडी कठिनता से वह
एक सॉचे मे ढालती है
इस दुनिया मे सघर्ष करने का
होसला देती है,
उसके सारे दु:खो को, तकलिफो की
अपने ममतामय ऑचल मे
समेट लेती है
ऐसी ममतामय मॉ को
खो देने के बाद जीवन मे कितना वीराना,
सुनापन आ जाता है।
यह सत्य है,
कि यहससार नश्वर है
एक दिन सभी को यहॉ से जाना है
लेकिन छोटी उम्र मे
तुम्हारे वियोग के बिना भी जीना पडेगा
इसे हम ने कभी सोचा नही था।
अपने दायित्व से मुक्त होने का
एहसास तुम्हे भले रहा हो
किन्तु तुम्हारे न रहने पर
तुम्हारा अपना बगीचा,
अपना उपवन
कितना विरान हो जायेगाि
इसे भी सोचा था ?

मॉ!
जीते जी तो तुमने मुझे
वादा करने का अवसर ही नही दिया
किन्तु आज मै तुमसे
एक वादा करता हू-
जिन्दगी के किसी भी मोड पर
किसी भी परिस्थिति मे
हार नही मानूगा।
जीवन यात्रा मे चाहे कितनी ही बडी
रुकावटे क्यो न आए
हसते हसते उनका मुकाबला करुगा।
तुम्हारी प्रेरणा तुम्हारे आदर्श
कदम कदम पर
मुझे सम्बल प्रदान करेगे।

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